Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 476
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1केवल शुद्धा भक्ति गोविंद राधे।
2स्वयंरूप श्रीकृष्ण प्राप्ति करा दे॥ 5552॥
3सर्वश्रेष्ठ शुद्धा भक्ति गोविंद राधे।
4गोपी प्रेम है आदर्श बता दे॥ 5553॥
5शुद्ध दिव्य प्रेम की तो गोविंद राधे।
6निर्मल मूर्ति ब्रज गोपी बता दे॥ 5554॥
7ऐश्वर्य भाव त्याज्य गोविंद राधे।
8दिव्यदृष्टियुक्त अर्जुन को डरा दे॥ 5555॥
9श्रीकृष्ण लगें प्यारे गोविंद राधे।
10भगवान कृष्ण अर्जुन को डरा दें॥ 5556॥
11ऐश्वर्ययुक्त भक्ति गोविंद राधे।
12उत्पन्न होकर भी बढ़े ना बता दे॥ 5557॥
13मोहिं मानो छोटा या गोविंद राधे।
14अपने समान मानो हरि कह बता दे॥ 5558॥
15कृष्ण ऐश्वर्य में तो गोविंद राधे।
16भय संकोच दोनों रहते बता दे॥ 5559॥
17कृष्ण माधुर्य में तो गोविंद राधे।
18ममता अधिक ही रहती बता दे॥ 5560॥
19श्रीकृष्ण ऐश्वर्य गोविंद राधे।
20काल भय को भी भयभीत करा दे॥ 5561॥
21श्रीकृष्ण माधुर्य गोविंद राधे।
22श्रीकृष्ण को भी मोहित करवा दे॥ 5562॥
23ऐश्वर्य अधिकार गोविंद राधे।
24तन, माधुर्य तन मन पै बता दे॥ 5563॥