Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 472
Reading 483 of 516 · Source nos. 5504–5515 · Source PDF 489
1बाबा ने कहा तुम गोविंद राधे।
2जाओ जहाँ तुम्हें जाना है बता दे॥ 5504॥
3पार्थ ने कहा बाबा गोविंद राधे।
4तलवार हाथ में क्यों लिये हो बता दे॥ 5505॥
5बाबा ने कहा मेरे गोविंद राधे।
6तीन शत्रु उन्हें मारना है बता दे॥ 5506॥
7पार्थ ने कहा वे हैं गोविंद राधे।
8कौन कौन बाबा टुक नाम बता दे॥ 5507॥
9बाबा ने कहा भृगु गोविंद राधे।
10द्रौपदी अरु एक अर्जुन बता दे॥ 5508॥
11भृगु उर लात मारा गोविंद राधे।
12द्रौपदी ने जूठन खिलाया बता दे॥ 5509॥
13पार्थ ने कृष्ण ते गोविंद राधे।
14अपना रथ हँकवाया बता दे॥ 5510॥
15बाबा ने कहा तुम गोविंद राधे।
16तीनों को मारि सको तो बता दे॥ 5511॥
17पार्थ ने कहा बाबा गोविंद राधे।
18भृगु तो है विप्र नारी द्रौपदी बता दे॥ 5512॥
19इनको मारना है पाप गोविंद राधे।
20अच्छा नमस्कार जाता हूँ बता दे॥ 5513॥
21पार्थ के बारे में गोविंद राधे।
22क्या बोलते भागे तुरत बता दे॥ 5514॥
23कोइ भजे निर्गुण ब्रह्म गोविंद राधे।
24कोइ भजे सगुण श्रीकृष्ण बता दे॥ 5515॥