Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 471
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1सखी ने बताया सब गोविंद राधे।
2श्यामसुखहित निज कर्म बता दे॥ 5492॥
3राधा ने डाटा कहा गोविंद राधे।
4झूठ ही कहे चाहूँ श्याम सुख बता दे॥ 5493॥
5श्याम के सोने के गोविंद राधे।
6सुख में विघ्न डाले भोली बता दे॥ 5494॥
7यह तो है निज सुख गोविंद राधे।
8कामना, प्रेम में कलंक बता दे॥ 5495॥
9सूक्ष्मातिसूक्ष्म प्रेम गोविंद राधे।
10राधा ही जानें पूर्ण रूप ते बता दे॥ 5496॥
11एक बार पार्थ कृष्ण गोविंद राधे।
12दोनों गये बन में घूमने बता दे॥ 5497॥
13वहाँ देखा एक बाबा गोविंद राधे।
14सूखे सूखे पत्ते खाते बता दे॥ 5498॥
15वह बाबा नंगा था गोविंद राधे।
16वाम हस्त थी तलवार बता दे॥ 5499॥
17पार्थ ने कहा बाबा गोविंद राधे।
18कछु है जिज्ञासा चाहो तो बता दे॥ 5500॥
19पार्थ ने पूछा बाबा गोविंद राधे।
20सूखे पत्ते क्यों खाते हो बता दे॥ 5501॥
21बाबा ने कहा यह गोविंद राधे।
22नश्वर शरीर भौतिक है बता दे॥ 5502॥
23इसके लिए मैं क्यों गोविंद राधे।
24वनस्पतियों को कष्ट दूँ बता दे॥ 5503॥