लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 468

Reading 479 of 516 · Source nos. 5456–5467 · Source PDF 485

1निष्ठुरता है गुण गोविंद राधे।

2आग में तपा के सोना चमक बढ़ा दे॥ 5456॥

3निष्ठुरता है गुण गोविंद राधे।

4झूठे सच्चे प्रेम की परख बता दे॥ 5457॥

5निष्ठुरता है गुण गोविंद राधे।

6प्रेमी सोचे मेरा प्रेम कम है बता दे॥ 5458॥

7निष्ठुरता है गुण गोविंद राधे।

8निज दोष लखि प्रेमी प्रेम को बढ़ा दे॥ 5459॥

9निष्ठुरता है गुण गोविंद राधे।

10निष्काम प्रेम की कसौटी बता दे॥ 5460॥

11प्रेमी के दुःख ते जो गोविंद राधे।

12पिय हो सुखी तो दुख सुख है बता दे॥ 5461॥

13प्रेमी में रहे नाहिं गोविंद राधे।

14बदले की भावना पिय ते बता दे॥ 5462॥

15प्रेमी तो है सेवक गोविंद राधे।

16सेव्य ते कभू कछु चाहे ना बता दे॥ 5463॥

17हरि ते तू प्रेम करु गोविंद राधे।

18तोसों हरि प्रेम करें मन ते भुला दे॥ 5464॥

19प्रेम की आदि हरि गोविंद राधे।

20प्रेम का मध्य अन्त हरि हैं बता दे॥ 5465॥

21वस्तुतस्तु प्रेम का गोविंद राधे।

22आदि अन्त कोई नहिं जाने बता दे॥ 5466॥

23जिसका हो आदि अन्त गोविंद राधे।

24वह कहलाता है काम बता दे॥ 5467॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

Source edition and PDF · Text version