Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 461
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1नैन बिनु देह जैसे गोविंद राधे।
2प्रेम बिनु वैसे कर्म धर्म बता दे॥ 5372॥
3नीर बिनु कूप जैसे गोविंद राधे।
4प्रेम बिनु वैसे योग सिद्धि बता दे॥ 5373॥
5शशी बिनु रैन जैसे गोविंद राधे।
6प्रेम बिनु वैसे ब्रह्मानंद बता दे॥ 5374॥
7क्षीर बिनु धेनु जैसे गोविंद राधे।
8प्रेम बिनु वैसे नेम वेद के बता दे॥ 5375॥
9कृष्ण के प्रेमी को गोविंद राधे।
10कर्मी, योगी, ज्ञानी आदि जानें ना बता दे॥ 5376॥
11कृष्ण के प्रेमी को गोविंद राधे।
12कृष्ण के प्रेमी ही जानें बता दे॥ 5377॥
13कृष्ण के प्रेमी की गोविंद राधे।
14क्रिया का रहस्य ज्ञानी जाने ना बता दे॥ 5378॥
15प्रेमी की कुटिल गति गोविंद राधे।
16याते प्रेम बुद्धि अतीत बता दे॥ 5379॥
17बाहर सर्प टेढ़ा चले गोविंद राधे।
18बिल में घुसे किन्तु सीधा बता दे॥ 5380॥
19ऐसे ही कृष्ण प्रेमी गोविंद राधे।
20भीतर कछु बाहर कछु हो बता दे॥ 5381॥
21गोपी मुख ना ना कह गोविंद राधे।
22नैन हाँ हाँ कहि प्रेम प्रकट करा दे॥ 5382॥
23प्रीति की निराली रीति गोविंद राधे।
24ना का अर्थ हाँ, हाँ का अर्थ ना बता दे॥ 5383॥