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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 458

Reading 469 of 516 · Source nos. 5336–5347 · Source PDF 475

1सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।

2गोपियों के पाछे पाछे ब्रज में घुमा दे॥ 5336॥

3सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।

4नित्य तृप्त ब्रह्म उर प्यास बढ़ा दे॥ 5337॥

5सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।

6सेव्य ब्रह्म को क्रीतदास बना दे॥ 5338॥

7सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।

8प्रेमी, प्रेम, प्रियतम एक बना दे॥ 5339॥

9सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।

10प्रेमाधीन ब्रह्म जीव दोनों बता दे॥ 5340॥

11सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।

12मृत्यु लोक में भी गोलोक बुला दे॥ 5341॥

13सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।

14विश्वपाल को भी गोपाल बना दे॥ 5342॥

15सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।

16जगत-पिता को नन्दपूत बना दे॥ 5343॥

17सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।

18ब्रह्म सर्वज्ञ को भी अज्ञ बना दे॥ 5344॥

19सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।

20ब्रह्म को भी जीव ऊखल में बँधा दे॥ 5345॥

21सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।

22ब्रह्म को भी ग्वाल बाल खेल में हरा दें॥ 5346॥

23सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।

24ब्रह्म को हरा गोप घोड़ा बना दें॥ 5347॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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