Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 457
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1सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।
2प्रेम के अधीन श्यामा श्याम बता दे॥ 5324॥
3प्रेमाधीन मायाधीश गोविंद राधे।
4मायातीत मायाधीन सब ही बता दे॥ 5325॥
5मायाधीन मायातीत गोविंद राधे।
6मायाधीश तीनों माँगें प्रेमसुधा दे॥ 5326॥
7सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।
8ब्रह्म को भी जीव का खिलौना बना दे॥ 5327॥
9सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।
10पुरुषोत्तम को भी दास बना दे॥ 5328॥
11सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।
12ब्रह्म को भी जीव की साँटी डरा दे॥ 5329॥
13सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।
14बड़े ब्रह्म को प्रेम छोटा बना दे॥ 5330॥
15सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।
16सब ते बड़े ब्रह्म को भी रुला दे॥ 5331॥
17सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।
18ब्रह्म को भी जीव करताल पै नचा दे॥ 5332॥
19सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।
20ब्रह्म पूर्णकाम को सकाम बना दे॥ 5333॥
21सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।
22पूर्णब्रह्म को भी अपूर्ण बना दे॥ 5334॥
23सब ते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे।
24ब्रह्म को भी छाछ भिखारी बना दे॥ 5335॥