Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 455
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1सर्वस्व दे दे जो तो गोविंद राधे।
2तो पै हरि भी सर्वस्व लुटा दे॥ 5300॥
3लेना लेना छाँड़ु मन गोविंद राधे।
4देना देना सीख देना प्रेम दिला दे॥ 5301॥
5जहाँ जहाँ त्याग रहे गोविंद राधे।
6तहाँ तहाँ प्रेम का निवास बता दे॥ 5302॥
7जग प्रेम में भी जहाँ गोविंद राधे।
8त्याग होगा वहीं प्रेम होगा बता दे॥ 5303॥
9दास ते बड़ा है त्याग गोविंद राधे।
10संसार में भी सखा का ही बता दे॥ 5304॥
11सखा ते बड़ा है त्याग गोविंद राधे।
12जग में माता पिता का बता दे॥ 5305॥
13माता पिता ते बड़ा गोविंद राधे।
14त्याग जग में स्त्री पति का बता दे॥ 5306॥
15त्याग बिना प्रेम नाहिं गोविंद राधे।
16प्रेम बिना त्याग नाहिं होगा बता दे॥ 5307॥
17खोया सुत आया लखि गोविंद राधे।
18अस्वस्थ माँ उठ बैठे बता दे॥ 5308॥
19प्रेम हो जाने पै गोविंद राधे।
20त्याग भी आपु हो जाये बता दे॥ 5309॥
21प्रेम में तितिक्षा तो गोविंद राधे।
22आपु ही आ जायेगी बता दे॥ 5310॥
23प्रेम में पवित्रता भी गोविंद राधे।
24अपने आप आ जाये बता दे॥ 5311॥