Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 449
Reading 460 of 516 · Source nos. 5228–5239 · Source PDF 466
1काम का तो परिणाम गोविंद राधे।
2दुःख अशान्ति अतृप्ति बता दे॥ 5228॥
3प्रेम है सुख रूप गोविंद राधे।
4काम है अनित्य दुख रूप बता दे॥ 5229॥
5कामना है गन्दी नाली गोविंद राधे।
6प्रेम तो दिव्य गंगा जल ज्योँ बता दे॥ 5230॥
7पिय सुख चह प्रेम गोविंद राधे।
8निज सुख चहे कामना है बता दे॥ 5231॥
9श्रीकृष्ण सुख हित गोविंद राधे।
10कामना हो जामें वाय प्रेम बता दे॥ 5232॥
11काम अग्नि प्रेम रस गोविंद राधे।
12यह कामना तो प्रेमरस को सुखा दे॥ 5233॥
13प्रेम में प्यास तो है गोविंद राधे।
14कामना नहीं है यह भेद बता दे॥ 5234॥
15काम में तो सुख को गोविंद राधे।
16निज ढिग लाया जाता है बता दे॥ 5235॥
17प्रेम में तो सुख को गोविंद राधे।
18प्रिय ढिग ले जाया जाता है बता दे॥ 5236॥
19काम में अभाव रहे गोविंद राधे।
20प्रेम में आनन्द तृप्ति बता दे॥ 5237॥
21दिव्य प्रेम रस ऐसा गोविंद राधे।
22नित्य तृप्ति नित्य प्यास साथ बता दे॥ 5238॥
23काम है कृष्ण पुत्र गोविंद राधे।
24दूजा नाम वाय प्रद्युम्न बता दे॥ 5239॥