Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 447
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1कामना ने तोहिं मारा गोविंद राधे।
2तू भी कामनाओं को मारि के दिखा दे॥ 5204॥
3मन को ऐसा बना गोविंद राधे।
4कामना का कछु रहे काम ना बता दे॥ 5205॥
5प्रह्लाद वर माँगा गोविंद राधे।
6माँगने की मेरी कामना मिटा दे॥ 5206॥
7हरि यदि पूछें का दें गोविंद राधे।
8हरि को बता दे गोपीप्रेम दिला दें॥ 5207॥
9प्रेम शब्द सब बोलें गोविंद राधे।
10प्रेम अर्थ तो जाने बिरला बता दे॥ 5208॥
11तनु साथ जाति धर्म गोविंद राधे।
12भाषा नाम छूटे प्रेम छूटे ना बता दे॥ 5209॥
13स्वर्ण चेतन ना गोविंद राधे।
14जड़ है, जड़ का प्रेम मोह बता दे॥ 5210॥
15ऐसे तनु चेतन ना गोविंद राधे।
16जड़ है, जड़ का प्रेम मोह बता दे॥ 5211॥
17कामना भरी है उर गोविंद राधे।
18प्रेम प्रेम मुख बोलें धोखा बता दे॥ 5212॥
19जहाँ प्रेम काम नहिं गोविंद राधे।
20जहाँ काम प्रेम नहिं रहता बता दे॥ 5213॥
21प्रेम अरु काम दोनों गोविंद राधे।
22छत्तीस अंक ज्यों विरोधी बता दे॥ 5214॥
23काँच अरु हीरा दोनों गोविंद राधे।
24एक सी चमक वाले होते हैं बता दे॥ 5215॥