Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 446
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1सदा ते सकाम रहे गोविंद राधे।
2अब अभ्यास निष्काम का करा दे॥ 5192॥
3मुक्ति कामना भी काम गोविंद राधे।
4भक्ति कामना ही निष्काम बता दे॥ 5193॥
5प्रेमी है मोक्षत्यागी गोविंद राधे।
6फल है अनन्त सुख प्राप्ति बता दे॥ 5194॥
7विषयी भी मोक्षत्यागी गोविंद राधे।
8फल है अनन्त दुख प्राप्ति बता दे॥ 5195॥
9प्रेमी है मोक्षत्यागी गोविंद राधे।
10फिर भी मिले मोक्ष आपु बता दे॥ 5196॥
11विषयी है मोक्षत्यागी गोविंद राधे।
12फल मिले कर्मों का बन्धन बता दे॥ 5197॥
13विषयों में सुखभ्रम गोविंद राधे।
14मिटे बिनु छूटे ना विषय बता दे॥ 5198॥
15विषयों के छूटे बिनु गोविंद राधे।
16श्रीकृष्ण में प्रेम हो भी ना बता दे॥ 5199॥
17कृष्णप्रेम हेतु क्या है गोविंद राधे।
18यह है स्वभाव, हेतु कछु ना बता दे॥ 5200॥
19शुद्ध प्रेम में ना रहे गोविंद राधे।
20मोक्ष सुख या प्रेम सुख भी बता दे॥ 5201॥
21शुद्ध प्रेम में तो रहे गोविंद राधे।
22श्यामा श्याम निष्काम सेवा बता दे॥ 5202॥
23जिस प्रेम में मन का गोविंद राधे।
24संयम अभाव वह प्रेम ना बता दे॥ 5203॥