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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 438

Reading 449 of 516 · Source nos. 5096–5107 · Source PDF 455

1सकल कलाविज्ञ गोविंद राधे।

2भक्तप्रिय भक्तभक्तिमान बता दे॥ 5096॥

3भक्तभयहारी कृष्ण गोविंद राधे।

4भक्तचरणरजकांक्षी बता दे॥ 5097॥

5भक्तसर्वस्व कृष्ण गोविंद राधे।

6शरणागतवत्सल कृष्ण बता दे॥ 5098॥

7भक्त ऋणयुक्त कृष्ण गोविंद राधे।

8भक्तप्रतिज्ञापालक बता दे॥ 5099॥

9महाभारत में गोविंद राधे।

10हरि ने एक की प्रतिज्ञा बता दे॥ 5100॥

11हरि ने कहा था यह गोविंद राधे।

12शस्त्र न उठावूँ है प्रतिज्ञा बता दे॥ 5101॥

13इधर भीष्म ने भी की गोविंद राधे।

14शस्त्र उठवा दूँगा हरि ते बता दे॥ 5102॥

15कृष्ण भक्तवत्सल गोविंद राधे।

16चक्र उठा कर भीष्म को जिता दे॥ 5103॥

17दीनबन्धु दीनानाथ गोविंद राधे।

18नन्द यशोदा सुवन बता दे॥ 5104॥

19अनंत कल्याण गोविंद राधे।

20गुणगणनिलय हैं कृष्ण बता दे॥ 5105॥

21श्रीकृष्ण तनु का तो गोविंद राधे।

22प्रति रोम काम कमनीय बता दे॥ 5106॥

23सौन्दर्य माधुर्य गोविंद राधे।

24सौशील्य सौकुमार्य गुण हैं बता दे॥ 5107॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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