Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 437
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1हरि गुरु भक्ति करो गोविंद राधे।
2हरि गुरु तेरी सब बिगरी बना दे॥ 5084॥
3हरि हरिजन भक्ति गोविंद राधे।
4देवी देवता को प्रसन्न करा दे॥ 5085॥
5हरि हरिजन भक्ति गोविंद राधे।
6सब दैवी शक्तियों को दासी बना दे॥ 5086॥
7हरि हरिजन को तो गोविंद राधे।
8देवी देवता करें नमन बता दे॥ 5087॥
9निष्काम भक्त में तो गोविंद राधे।
10सब देवी देव करें वास बता दे॥ 5088॥
11निष्काम भक्त में तो गोविंद राधे।
12ज्ञान वैराग्य करें वास बता दे॥ 5089॥
13भक्त तो सब ही हैं गोविंद राधे।
14कोउ हरि के कोउ जग के बता दे॥ 5090॥
15जग प्रेम सीमा मृत्यु गोविंद राधे।
16हरि प्रेम सीमा अमरत्व बता दे॥ 5091॥
17जग प्रेम जीवों को गोविंद राधे।
18लख चौरासी योनि घुमा दे॥ 5092॥
19हरि प्रेम जीवों को गोविंद राधे।
20गोलोक में नित्य सेवा दिला दे॥ 5093॥
21भक्ति का साधन गोविंद राधे।
22भगवान का तत्वज्ञान बता दे॥ 5094॥
23आदर्श प्रेमी कृष्ण गोविंद राधे।
24नृत्य गीत वाद्य आदि विज्ञ बता दे॥ 5095॥