Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 436
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1राम श्याम दोनों एक गोविंद राधे।
2जाको मन जामें लगे वामें लगा दे॥ 5072॥
3नार हैं जीव सब गोविंद राधे।
4जीवआश्रय नारायण बता दे॥ 5073॥
5हरि में अनन्य रहो गोविंद राधे।
6अन्यों ते भाव तटस्थ बना दे॥ 5074॥
7देवों की भक्ति तो गोविंद राधे।
8मुक्ति कामियों ते भी त्याज्य बता दे॥ 5075॥
9भक्त तो मुक्ति त्यागी गोविंद राधे।
10वह देवभक्ति क्यों करेगा बता दे॥ 5076॥
11वृक्षमूल जल डारो गोविंद राधे।
12शाखा उपशाखा हो पुष्ट बता दे॥ 5077॥
13प्राण हित खाद्य ज्यों गोविंद राधे।
14देह इन्द्रियाँ सब पुष्ट हों बता दे॥ 5078॥
15ऐसे कृष्ण भक्ति करो गोविंद राधे।
16विश्व चराचर तृप्त हो बता दे॥ 5079॥
17स्कन्द पुराण कह गोविंद राधे।
18देवभक्तिकर्ता अति निंद्य बता दे॥ 5080॥
19जैसे निज माता तजि गोविंद राधे।
20चांडालिनी को सेवे बता दे॥ 5081॥
21जैसे दिव्यसुधा तजि गोविंद राधे।
22हालाहल को सेवे बता दे॥ 5082॥
23यदि सब देव मिलि गोविंद राधे।
24कृपा करें तो भी माया जाये ना बता दे॥ 5083॥