Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 433
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1किया कृष्ण अभिषेक गोविंद राधे।
2आकाश गंगा जल ते बता दे॥ 5036॥
3तब ते ही कृष्ण का गोविंद राधे।
4नाम हुआ गोविंद बता दे॥ 5037॥
5नारद शारद गोविंद राधे।
6आ गये सब कृष्ण पास बता दे॥ 5038॥
7स्वर्ग अप्सरायें भी गोविंद राधे।
8नाचने लगीं अति हर्ष ते बता दे॥ 5039॥
9पुनि सब आज्ञा ले गोविंद राधे।
10चले गये निज धाम बता दे॥ 5040॥
11इन्द्र गर्व मर्दन गोविंद राधे।
12तत्वज्ञान देता है सब को बता दे॥ 5041॥
13देवी देवताओं की गोविंद राधे।
14भक्ति नाहिं करनी है बता दे॥ 5042॥
15इन्द्र आदि देवता भी गोविंद राधे।
16काम क्रोध लोभ के हैं वश में बता दे॥ 5043॥
17इन्द्र ने माँगा वर गोविंद राधे।
18उर्वशी, इन्द्र को भी माया नचा दे॥ 5044॥
19देवी देवता तो हैं गोविंद राधे।
20आपु ही भिखारी वो भिखारी भीख का दे॥ 5045॥
21हरि हरिजन की ही गोविंद राधे।
22भक्ति अनन्य करणीय बता दे॥ 5046॥
23भक्ति भक्त भगवान गोविंद राधे।
24तीनों में अनन्य भाव रखना है बता दे॥ 5047॥