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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 431

Reading 442 of 516 · Source nos. 5012–5023 · Source PDF 448

1निज इच्छा ते ही गोविंद राधे।

2निर्मित दिव्य देह धारें बता दे॥ 5012॥

3आपका देह है गोविंद राधे।

4विशुद्ध ज्ञानस्वरूप बता दे॥ 5013॥

5मेरे गर्व का तो गोविंद राधे।

6अन्त भी नहीं था नाथ बता दे॥ 5014॥

7आप की कृपा ते ही गोविंद राधे।

8अब हुआ मन मेरा शान्त बता दे॥ 5015॥

9आप मेरे स्वामी हैं गोविंद राधे।

10आप ही मेरी आत्मा बता दे॥ 5016॥

11ऐसी कृपा करें गोविंद राधे।

12सदा सदा रहुँ शरण बता दे॥ 5017॥

13यह अस्तुति सुनि गोविंद राधे।

14इन्द्र ते बोले कृष्ण बता दे॥ 5018॥

15ऐश्वर्य मद ते गोविंद राधे।

16तुम हो गये थे प्रमत्त बता दे॥ 5019॥

17याते तुम्हारा यज्ञ गोविंद राधे।

18बन्द कराया यह कृपा है बता दे॥ 5020॥

19मद नष्ट होने ते गोविंद राधे।

20जीव करे मेरा स्मरण बता दे॥ 5021॥

21अब तुम जावो इन्द्र गोविंद राधे।

22अमरावती रजधानी बता दे॥ 5022॥

23अब कभू भूलिहूँ गोविंद राधे।

24करना ना मद पद का बता दे॥ 5023॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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