Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 430
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1उसका अहंकार गोविंद राधे।
2आप कर दें चूर चूर बता दे॥ 5000॥
3तब वह आप की गोविंद राधे।
4भक्ति अनन्य करे नित्य बता दे॥ 5001॥
5इन्द्र पद मद में ही गोविंद राधे।
6मैंने किये अपराध बता दे॥ 5002॥
7मेरे अपराध गोविंद राधे।
8हैं अक्षम्य किन्तु क्षमा दें बता दें॥ 5003॥
9मैं तो हूँ मायाबद्ध गोविंद राधे।
10एक अज्ञानी जीव बता दे॥ 5004॥
11अतएव आपके गोविंद राधे।
12दिव्य प्रभाव को जाना ना बता दे॥ 5005॥
13ऐसी कृपा करें गोविंद राधे।
14पुनि ऐसी भूल हो ना बता दे॥ 5006॥
15आप लै अवतार गोविंद राधे।
16असुरन मारि निज धाम पठा दें॥ 5007॥
17आप सर्वात्मा हैं गोविंद राधे।
18पुरु षोत्तम भी आप हैं बता दे॥ 5008॥
19यदुवंशियों के तो गोविंद राधे।
20आप ही एकमात्र स्वामी बता दे॥ 5009॥
21आप भक्तवत्सल गोविंद राधे।
22आप ही मदन मोहन हैं बता दे॥ 5010॥
23जीव सदृश आप गोविंद राधे।
24कर्म ते देह धारें ना बता दे॥ 5011॥