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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 429

Reading 440 of 516 · Source nos. 4988–4999 · Source PDF 446

1इन्द्र ने कृष्ण के गोविंद राधे।

2पग पै धरा सिर मुकुट बता दे॥ 4988॥

3इन्द्र ने करबद्ध गोविंद राधे।

4श्रीकृष्ण की अस्तुति की बता दे॥ 4989॥

5आप का स्वरूप शान्त गोविंद राधे।

6तीनों गुणों ते रहित बता दे॥ 4990॥

7विशुद्घ सत्व का ही गोविंद राधे।

8दिव्य चिन्मय है देह बता दे॥ 4991॥

9आपका सम्बन्ध गोविंद राधे।

10माया ते कभु होय ना बता दे॥ 4992॥

11याते क्रोध गर्व आदि गोविंद राधे।

12आप में न आवें कभु स्वप्न में बता दे॥ 4993॥

13धर्मरक्षा दुष्टनाश गोविंद राधे।

14हित आपका अवतार बता दे॥ 4994॥

15अवतार लै के करें गोविंद राधे।

16दिव्य अनुग्रह निग्रह बता दे॥ 4995॥

17आप जगत के गोविंद राधे।

18पिता गुरु अरु स्वामी हैं बता दे॥ 4996॥

19दुष्ट दमन हित गोविंद राधे।

20आप बन जायें काल भी बता दे॥ 4997॥

21भक्तों की इच्छावश गोविंद राधे।

22आप तनु धारें दिव्य बता दे॥ 4998॥

23मो सो अहंकारी गोविंद राधे।

24जो माने हौं ही ईश्वर बता दे॥ 4999॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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