Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 426
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1जब सब चले गये गोविंद राधे।
2तब कृष्ण ने धरा गिरि को बता दे॥ 4952॥
3सारे ब्रजवासी गोविंद राधे।
4आये पास श्रीकृष्ण के बता दे॥ 4953॥
5कोई चिपटाये कोई गोविंद राधे।
6चूमे कोई बलिहार बता दे॥ 4954॥
7कोई कहे यह कृष्ण गोविंद राधे।
8नर नहिं नारायण है बता दे॥ 4955॥
9कोई तिलक करे गोविंद राधे।
10कोई दे आशीष बता दे॥ 4956॥
11कोई पग चूमे गोविंद राधे।
12कोइ उतारे आरती बता दे॥ 4957॥
13कोई जय बोले गोविंद राधे।
14कोइ उतारे नजर बता दे॥ 4958॥
15यशोदा रोहिणी गोविंद राधे।
16राम ने लगाया उर श्याम को बता दे॥ 4959॥
17नभ में भी दिव्य देव गोविंद राधे।
18करें श्रीकृष्ण की अस्तुति बता दे॥ 4960॥
19दिव्य देवियाँ भी गोविंद राधे।
20करें नभ ते पुष्पवृष्टि बता दे॥ 4961॥
21सब ही ब्रजवासी गोविंद राधे।
22गये सहर्ष निज घर को बता दे॥ 4962॥
23ब्रज के वृद्ध गोप गोविंद राधे।
24सोचने लगे आश्चर्य ते बता दे॥ 4963॥