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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 425

Reading 436 of 516 · Source nos. 4940–4951 · Source PDF 442

1फिर भी है क्रोध गर्व गोविंद राधे।

2इसे करना है चूर चूर बता दे॥ 4940॥

3कृष्ण ने बुलाया निज गोविंद राधे।

4योगमाया को पास बता दे॥ 4941॥

5योगमाया ते कहा गोविंद राधे।

6ब्रज की रक्षा करो तुरत बता दे॥ 4942॥

7योगमाया बल गोविंद राधे।

8कृष्ण ने उठाया गिरिराज बता दे॥ 4943॥

9कहा ब्रजवासियों ते गोविंद राधे।

10सब आ जावो गिरि नीचे बता दे॥ 4944॥

11यह जनि सोचो मन गोविंद राधे।

12गोवर्धन गिरि गिरेगो बता दे॥ 4945॥

13सारा ब्रजमण्डल गोविंद राधे।

14गिरि के गर्त में आ गया बता दे॥ 4946॥

15सात दिन रात तक गोविंद राधे।

16कृष्ण उठाये रहे गिरि को बता दे॥ 4947॥

17कृष्ण का प्रभाव लखि गोविंद राधे।

18इन्द्र को हुआ आश्चर्य बता दे॥ 4948॥

19गर्व चूर चूर हुआ गोविंद राधे।

20इन्द्र ने रोका मेघों को बता दे॥ 4949॥

21कृष्ण ने कहा गोपों गोविंद राधे।

22आँधी पानी बन्द हो गया बता दे॥ 4950॥

23अब सब मिलि के गोविंद राधे।

24बाहर जावो निकसि बता दे॥ 4951॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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