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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 424

Reading 435 of 516 · Source nos. 4928–4939 · Source PDF 441

1इसी के कहने ते गोविंद राधे।

2मेरी पूजा भई बन्द बता दे॥ 4928॥

3कृष्णानुयायियों के गोविंद राधे।

4गर्व को मेघों मिटा दो बता दे॥ 4929॥

5ऐरावत पै गोविंद राधे।

6बैठकर मैं भी आता हूँ बता दे॥ 4930॥

7फिर क्या था मेघों ने गोविंद राधे।

8मूसलाधार की वृष्टि बता दे॥ 4931॥

9गरजे भी चमके भी गोविंद राधे।

10ओले गिरे आई आँधी बता दे॥ 4932॥

11थोड़ी ही देर में गोविंद राधे।

12ब्रज हुआ जल में मग्न बता दे॥ 4933॥

13आँधी पानी ते गोविंद राधे।

14पशु भी ठिठुरने लगे थे बता दे॥ 4934॥

15ग्वाल अरु ग्वालिनें गोविंद राधे।

16हो गइँ अतिशय विकल बता दे॥ 4935॥

17सब गये कृष्ण ढिग गोविंद राधे।

18कहा कृष्ण त्राहि त्राहि माम् बता दे॥ 4936॥

19कृष्ण अब तुम ही गोविंद राधे।

20इन्द्र के कोप ते बचाओ बता दे॥ 4937॥

21कृष्ण ने जान लिया गोविंद राधे।

22यह करतूत है इन्द्र की बता दे॥ 4938॥

23कृष्ण ने कहा इन्द्र गोविंद राधे।

24सत्व गुण प्रधान है देव बता दे॥ 4939॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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