Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 423
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1कृष्ण योगमाया ते गोविंद राधे।
2तनु धरि लीनो विराट बता दे॥ 4916॥
3गिरिराज ऊपर गोविंद राधे।
4खरे हो गये श्रीकृष्ण बता दे॥ 4917॥
5हौं हौं गिरिराज गोविंद राधे।
6ऐसा कहि लगे खाने बता दे॥ 4918॥
7पूर्व कृष्ण रूप ने भी गोविंद राधे।
8किया गिरिराज को प्रणाम बता दे॥ 4919॥
9पूज्य कृष्ण गिरिराज गोविंद राधे।
10पूजक कृष्ण नँदलाल बता दे॥ 4920॥
11इमि ब्रजवासियों ने गोविंद राधे।
12पूजा गिरिराज लौटे घर को बता दे॥ 4921॥
13कोई नहिं जान सका गोविंद राधे।
14गिरिराज हैं श्रीकृष्ण ही बता दे॥ 4922॥
15इन्द्र को पता लगा गोविंद राधे।
16मेरी पूजा भई बन्द बता दे॥ 4923॥
17इन्द्र अति कु्रद्ध हुआ गोविंद राधे।
18उसे था गर्व ईश्वर हौं बता दे॥ 4924॥
19इन्द्र ने प्रलयकारी गोविंद राधे।
20मेघों ते कहा ब्रज को डुबा दे॥ 4925॥
21इन्द्र है मायाधीन गोविंद राधे।
22कृष्ण हैं ब्रह्म नहिं जाना बता दे॥ 4926॥
23इन्द्र ने कहा कृष्ण गोविंद राधे।
24नादान अज्ञानयुक्त है बता दे॥ 4927॥