Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 422
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1सृष्टि का एकमात्र गोविंद राधे।
2शासक है भगवान बता दे॥ 4904॥
3इन्द्र आदि देव भी गोविंद राधे।
4भगवान ते हैं शास्य बता दे॥ 4905॥
5कृष्ण कह बाबा सुनु गोविंद राधे।
6हम तो सदा ते वनवासी बता दे॥ 4906॥
7वन अरु पर्वत गोविंद राधे।
8ये ही हमारे घर हैं बता दे॥ 4907॥
9गिरि गोवर्धन गोविंद राधे।
10गोधन का पोषक है बता दे॥ 4908॥
11याते पूजा भी गोविंद राधे।
12गोवर्धन की ही करियो बता दे॥ 4909॥
13कृष्ण का लक्ष्य था गोविंद राधे।
14मायिक इन्द्र पूजा बन्द हो बता दे॥ 4910॥
15कृष्ण की बात को गोविंद राधे।
16नंद आदि वृद्धों ने माना बता दे॥ 4911॥
17जैसा श्रीकृष्ण ने गोविंद राधे।
18कहा वैसा सबने किया भी बता दे॥ 4912॥
19स्वस्ति वाचन करि गोविंद राधे।
20गायों को खिलाई हरी घास बता दे॥ 4913॥
21गायों को आगे करि गोविंद राधे।
22गिरिराज की की प्रदक्षिणा बता दे॥ 4914॥
23सब ब्रजवासी भी गोविंद राधे।
24गिरिराज की की परिक्रमा बता दे॥ 4915॥