Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 420
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1यह इन्द्रयज्ञ कर्म गोविंद राधे।
2लौकिक या वैदिक है बता दे॥ 4880॥
3नंद ने कहा बेटा गोविंद राधे।
4इन्द्र हैं मेघों के स्वामी बता दे॥ 4881॥
5इन्द्र ही भूमि पै गोविंद राधे।
6सदा ही जल बरसायें बता दे॥ 4882॥
7उन्हीं इन्द्रदेव की गोविंद राधे।
8यज्ञ द्वारा करें पूजा बता दे॥ 4883॥
9जिन सामग्रियों ते गोविंद राधे।
10पूजें वे हों जल ते बता दे॥ 4884॥
11कृषि आदि कर्मों के गोविंद राधे।
12फलदाता इन्द्र देव हैं बता दे॥ 4885॥
13जो राग द्वेषवश गोविंद राधे।
14पूजे न इन्द्र दण्ड पावे बता दे॥ 4886॥
15कृष्ण ने ठान लिया गोविंद राधे।
16इन्द्र की पूजा होने देंगे ना बता दे॥ 4887॥
17कृष्ण ने बाबा ते गोविंद राधे।
18कहा बाबा मेरी मानो बता दे॥ 4888॥
19जीव निज कर्मों ते गोविंद राधे।
20पैदा भी हो अरु मरे भी बता दे॥ 4889॥
21कर्म अनुसार ही गोविंद राधे।
22सुख दुख आदि हों प्राप्त बता दे॥ 4890॥
23कर्म ही है सब कछु गोविंद राधे।
24ऐसा न माने जो कोई बता दे॥ 4891॥