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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 419

Reading 430 of 516 · Source nos. 4868–4879 · Source PDF 436

1तब हारि कृष्ण ने गोविंद राधे।

2निज रूप कृष्ण का दिखाया बता दे॥ 4868॥

3यह है अनन्यता का गोविंद राधे।

4जीता जागता नमूना बता दे॥ 4869॥

5श्रीकृष्ण वृन्दावन गोविंद राधे।

6नित नई नई करें लीला बता दे॥ 4870॥

7एक दिन कृष्ण ने गोविंद राधे।

8देखा इन्द्रयज्ञ तैयारी बता दे॥ 4871॥

9यद्यपि श्रीकृष्ण गोविंद राधे।

10सर्वज्ञ अन्तर्यामी बता दे॥ 4872॥

11फिर भी नन्दबाबा गोविंद राधे।

12आदि वृद्ध गोपों ते पूछा बता दे॥ 4873॥

13आप लोग कौन सा गोविंद राधे।

14उत्सव मनाना चाहें बता दे॥ 4874॥

15इस उत्सव का गोविंद राधे।

16फल क्या मिलेगा यह मोय बता दे॥ 4875॥

17साधन क्या है अरु गोविंद राधे।

18साध्य भी क्या है इसका बता दे॥ 4876॥

19जग में दो भाँति के गोविंद राधे।

20लोग हैं अज्ञ अरु विज्ञ बता दे॥ 4877॥

21कछु कर्म अज्ञ जन गोविंद राधे।

22करें परम्परागत व्यर्थ बता दे॥ 4878॥

23कछु कर्म विज्ञ जन गोविंद राधे।

24करें शास्त्र सम्मत जग में बता दे॥ 4879॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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