Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 418
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1आप को नमस्कार गोविंद राधे।
2सहस्र दंत के चक्र बता दे॥ 4856॥
3आप दुर्वासा की गोविंद राधे।
4रक्षा करो मम प्रार्थना बता दे॥ 4857॥
5आप श्रीकृष्ण के गोविंद राधे।
6तेज अनन्त स्वरूप बता दे॥ 4858॥
7आप समस्त विश्व गोविंद राधे।
8रक्षक हैं तेजयुक्त बता दे॥ 4859॥
9आप तो हैं अजित गोविंद राधे।
10सर्वशक्तिमान तेजवान बता दे॥ 4860॥
11बेर ना लगावें अब गोविंद राधे।
12वेगि करें रक्षा मुनि की बता दे॥ 4861॥
13अम्बरीष अस्तुति ते गोविंद राधे।
14चक्र हो गये शान्तचित्त बता दे॥ 4862॥
15दुर्वासा ने भी गोविंद राधे।
16भक्त भक्ति ते हार मान ली बता दे॥ 4863॥
17राजा अम्बरीष गोविंद राधे।
18श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे बता दे॥ 4864॥
19एक बार कृष्ण ने गोविंद राधे।
20अम्बरीष की ली परीक्षा बता दे॥ 4865॥
21इन्द्र बनि गये कृष्ण गोविंद राधे।
22कहा अम्बरीष वर माँगो बता दे॥ 4866॥
23अम्बरीष बोले मैं तो गोविंद राधे।
24कृष्ण ते ही वर माँगूँगा बता दे॥ 4867॥