Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 417
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1मेरे सिवा भक्त गोविंद राधे।
2कछु भी नहीं जानते हैं बता दे॥ 4844॥
3भक्त के सिवा मैं भी गोविंद राधे।
4और कछु जानूँ नाहिं बता दे॥ 4845॥
5सुनु दुर्वासा मुनि गोविंद राधे।
6जेहि अपराध हो विकल बता दे॥ 4846॥
7उसी अम्बरीष की गोविंद राधे।
8शरण जावो माँगो क्षमा भी बता दे॥ 4847॥
9अम्बरीष राजा अति गोविंद राधे।
10कोमल स्वभाव के भक्त बता दे॥ 4848॥
11क्षमा माँगते ही गोविंद राधे।
12क्षमा कर देंगे तुमको बता दे॥ 4849॥
13तुम यह जान गये गोविंद राधे।
14भक्ति भक्त भगवान एक हैं बता दे॥ 4850॥
15पुनि गये दुर्वासा गोविंद राधे।
16राजा अम्बरीष पास बता दे॥ 4851॥
17चरण पकड़ कर गोविंद राधे।
18रोने लगे दुर्वासा बता दे॥ 4852॥
19चरण पकड़ने ते गोविंद राधे।
20लज्जित भये अम्बरीष बता दे॥ 4853॥
21पुनि अम्बरीष ने गोविंद राधे।
22चक्र की कीनी अस्तुति बता दे॥ 4854॥
23बोले अम्बरीष गोविंद राधे।
24हे चक्र आप अग्नि सूर्य बता दे॥ 4855॥