Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 416
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1मैं निज भक्तों का गोविंद राधे।
2एकमात्र आश्रय ही हूँ बता दे॥ 4832॥
3याते निज भक्त तजि गोविंद राधे।
4नहिं चह कमलाहूँ को बता दे॥ 4833॥
5कहँ लौं कहौं मुनि गोविंद राधे।
6अपने आप को भी चहूँ ना बता दे॥ 4834॥
7जिसने सर्वस्व तजि गोविंद राधे।
8ली मेरी शरणाई बता दे॥ 4835॥
9उसको छोड़ने की गोविंद राधे।
10बात भी नहीं सोच सकता बता दे॥ 4836॥
11जैसे सती नारी गोविंद राधे।
12प्रेम ते करे वश पति को बता दे॥ 4837॥
13ऐसे ही मेरे भक्त गोविंद राधे।
14मुझको करें निज वश में बता दे॥ 4838॥
15भक्त सेवा ते ही गोविंद राधे।
16मेरे भक्त हों कृतार्थ बता दे॥ 4839॥
17सालोक्य सारूप्य गोविंद राधे।
18सार्ष्टि सामीप्य मुक्ति ठुकरा दे॥ 4840॥
19सुनो दुर्वासा मुनि गोविंद राधे।
20कहँ लौं कहूँ भक्त महिमा बता दे॥ 4841॥
21मेरे प्रेमी भक्त गोविंद राधे।
22मेरे ही हैं हृदय बता दे॥ 4842॥
23मैं भी भक्तों का गोविंद राधे।
24एकमात्र आप हूँ हृदय बता दे॥ 4843॥