Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 415
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1अब दुर्वासा गये गोविंद राधे।
2सीधे वैकुण्ठ धाम बता दे॥ 4820॥
3वैकुण्ठ धाम में गोविंद राधे।
4कमला सहित विष्णुवास बता दे॥ 4821॥
5तहँ दुर्वासा मुनि गोविंद राधे।
6गिरे हरिपद भयभीत बता दे॥ 4822॥
7दुर्वासा बोले गोविंद राधे।
8आप हैं अनन्त शक्तिमान बता दे॥ 4823॥
9आप हैं भक्तों के गोविंद राधे।
10एकमात्र आधार बता दे॥ 4824॥
11हे जीवन धन! गोविंद राधे।
12हम हैं नामापराधी बता दे॥ 4825॥
13अब तो आप ही गोविंद राधे।
14मेरी रक्षा कीजिये बता दे॥ 4826॥
15आपके प्रभाव को गोविंद राधे।
16जाना नाहिं मैं मूढ़ बता दे॥ 4827॥
17आप के तो नाम ते गोविंद राधे।
18बड़े बड़े पापी तरि जायें बता दे॥ 4828॥
19भगवान बोले मुनि गोविंद राधे।
20मैं हूँ भक्त-आधीन बता दे॥ 4829॥
21वेद स्वतंत्र कहे गोविंद राधे।
22किन्तु मैं हूँ परतंत्र बता दे॥ 4830॥
23भक्त करे मेरी भक्ति गोविंद राधे।
24मैं करुँ भक्त की भक्ति बता दे॥ 4831॥