Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 413
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1अम्बरीष शान्त चित्त गोविंद राधे।
2कृष्ण स्मरण कर रहे थे बता दे॥ 4796॥
3उनकी रक्षा हित गोविंद राधे।
4पूर्व ही नियुक्त था चक्र बता दे॥ 4797॥
5धधकती ज्वाला ज्यों गोविंद राधे।
6फणी सर्प को भी जला दे बता दे॥ 4798॥
7ऐसे ही चक्र ने भी गोविंद राधे।
8कृत्या को जला डाला बता दे॥ 4799॥
9देखा दुर्वासा ने गोविंद राधे।
10मेरी शक्ति कृत्या जल गई बता दे॥ 4800॥
11डर के मारे तब गोविंद राधे।
12प्राण बचाने को भागे बता दे॥ 4801॥
13चक्र ने पीछा किया गोविंद राधे।
14जहाँ जहाँ गये दुर्वासा बता दे॥ 4802॥
15सात स्वर्ग ऊपर गोविंद राधे।
16सात पाताल नीचे भागे बता दे॥ 4803॥
17चक्र ने सर्वत्र गोविंद राधे।
18पीछा किया उन मुनि का बता दे॥ 4804॥
19पुनि गये दुर्वासा गोविंद राधे।
20ब्रह्मा के पास ब्रह्मलोक बता दे॥ 4805॥
21ब्रह्मा ते कहा मेरी गोविंद राधे।
22रक्षा करो रक्षा करो चक्र ते बता दे॥ 4806॥
23ब्रह्मा ने कहा सुनो गोविंद राधे।
24हे दुर्वासा महर्षि बता दे॥ 4807॥