Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 412
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1दोनों में छिड़ गया गोविंद राधे।
2युद्ध महान कौन जीते बता दे॥ 4784॥
3दुर्वासा क्रुद्ध हुये गोविंद राधे।
4यही थी पहली हार बता दे॥ 4785॥
5अम्बरीष शान्त खरे गोविंद राधे।
6कर जोरे अति नम्र बता दे॥ 4786॥
7दुर्वासा क्रोध ते गोविंद राधे।
8लगे थर थर थर काँपने बता दे॥ 4787॥
9भौंहें तन गईं गोविंद राधे।
10मुख भी हो गया विकट बता दे॥ 4788॥
11दुर्वासा बोले डाटि गोविंद राधे।
12तू मतवाला क्रूर है बता दे॥ 4789॥
13भक्ति का लेश नहिं गोविंद राधे।
14राज्य के मद में मत्त बता दे॥ 4790॥
15मुझको खिलाये बिनु गोविंद राधे।
16कर लिया पारण तूने बता दे॥ 4791॥
17अभी चखाता हूँ गोविंद राधे।
18मजा शाप दै के तोहिं बता दे॥ 4792॥
19क्रोध में उखाड़ी जटा गोविंद राधे।
20एक कृत्या उत्पन्न की बता दे॥ 4793॥
21कृत्या ते कहा तू गोविंद राधे।
22अम्बरीष का सिर काट दे बता दे॥ 4794॥
23कृत्या अग्नि ज्वाला ज्यों गोविंद राधे।
24लै के तलवार चली मारने बता दे॥ 4795॥