Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 411
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1घड़ी भर शेष रहा गोविंद राधे।
2व्रत के पारण काल का बता दे॥ 4772॥
3तब अम्बरीष पै गोविंद राधे।
4आ गया धर्मसंकट सा बता दे॥ 4773॥
5मुनि को खिलाये बिनु गोविंद राधे।
6पारण करना दोष है बता दे॥ 4774॥
7द्वादशी रहते गोविंद राधे।
8पारण ना करे दोष है बता दे॥ 4775॥
9वेदवेत्ताओं ते गोविंद राधे।
10किया विचार अम्बरीष ने बता दे॥ 4776॥
11वेद में बताया जल गोविंद राधे।
12पीना है खाना नहिं खाना बता दे॥ 4777॥
13अतः अम्बरीष ने गोविंद राधे।
14पारण में जल पी लिया बता दे॥ 4778॥
15पुनि दुर्वासा के गोविंद राधे।
16आने को लगे परखने बता दे॥ 4779॥
17इतने में आये तहँ गोविंद राधे।
18दुर्वासा भी नहा के बता दे॥ 4780॥
19जानि गये दुर्वासा गोविंद राधे।
20पारण किया अम्बरीष ने बता दे॥ 4781॥
21एक ओर दुर्वासा गोविंद राधे।
22त्यागी तपी संन्यासी बता दे॥ 4782॥
23एक ओर अम्बरीष गोविंद राधे।
24क्षत्रिय भक्त गृहस्थ बता दे॥ 4783॥