Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 410
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1प्रेमयुक्त पूजा की गोविंद राधे।
2चन्दन आदि ते कृष्ण की बता दे॥ 4760॥
3साठ करोड़ गाय गोविंद राधे।
4स्वर्ण सींगयुक्त दान दीनी बता दे॥ 4761॥
5पारण करने की गोविंद राधे।
6की तैयारी अम्बरीष ने बता दे॥ 4762॥
7इतने में आये तहँ गोविंद राधे।
8परम तपस्वी दुर्वासा बता दे॥ 4763॥
9शाप या वरदान गोविंद राधे।
10देने में समर्थ दुर्वासा बता दे॥ 4764॥
11उनको देखते ही गोविंद राधे।
12खड़े हो गये अम्बरीष बता दे॥ 4765॥
13षोडशोपचार ते गोविंद राधे।
14पूजा दुर्वासा को बता दे॥ 4766॥
15पुनि किया उनको गोविंद राधे।
16दण्डवत् प्रणाम अम्बरीष ने बता दे॥ 4767॥
17कहा अम्बरीष ने गोविंद राधे।
18अब आप भोजन कीजिये बता दे॥ 4768॥
19कहा दुर्वासा ने गोविंद राधे।
20ठीक है भोजन करूँगा बता दे॥ 4769॥
21दुर्वासा नहाने को गोविंद राधे।
22चले गये यमुना तट पै बता दे॥ 4770॥
23ब्रह्म का ध्यान करि गोविंद राधे।
24यमुना नहाये मुनि भी बता दे॥ 4771॥