Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 409
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1नासा अनुरक्त थी गोविंद राधे।
2मूर्ति चढ़ी तुलसी गंध में बता दे॥ 4748॥
3जिह्वा अनुरक्त थी गोविंद राधे।
4कृष्ण के भोग प्रसाद में बता दे॥ 4749॥
5सिर अनुरक्त था गोविंद राधे।
6हरि हरिजन के नमन में बता दे॥ 4750॥
7सुत वित नारी ते गोविंद राधे।
8अम्बरीष थे अनासक्त बता दे॥ 4751॥
9उनकी भक्ति ते गोविंद राधे।
10कृष्ण थे इतने प्रसन्न बता दे॥ 4752॥
11उनकी रक्षा में गोविंद राधे।
12कृष्ण ने चक्र रख दिया था बता दे॥ 4753॥
13अम्बरीष पत्नी भी गोविंद राधे।
14कृष्ण की अनन्य भक्ता थी बता दे॥ 4754॥
15एक बार अम्बरीष गोविंद राधे।
16पत्नी सहित भक्तियुक्त बता दे॥ 4755॥
17एकादशी व्रत को गोविंद राधे।
18एक वर्ष तक किया प्रेम ते बता दे॥ 4756॥
19व्रत की समाप्ति पै गोविंद राधे।
20किया तीन दिन उपवास बता दे॥ 4757॥
21यमुना नहा के गोविंद राधे।
22मधुवन की की पूजा बता दे॥ 4758॥
23महाभिषेक किया गोविंद राधे।
24श्रीकृष्ण का अम्बरीष ने बता दे॥ 4759॥