Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 408
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1भक्त भगवान दोनों गोविंद राधे।
2एक दूसरे का सुख चाहें बता दे॥ 4736॥
3ह्लादिनी का सार भक्ति गोविंद राधे।
4जाको मिल जाय सोई भक्त बता दे॥ 4737॥
5भक्त प्रति अपराध गोविंद राधे।
6कोटि साधनों ते भी कभू ना क्षमा दे॥ 4738॥
7नभग पुत्र नाभाग गोविंद राधे।
8नाभाग पुत्र अम्बरीष बता दे॥ 4739॥
9अम्बरीष तो थे गोविंद राधे।
10श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त बता दे॥ 4740॥
11पृथ्वी के सातों ही गोविंद राधे।
12द्वीप ऐश्वर्य उन्हें प्राप्त थे बता दे॥ 4741॥
13किन्तु भक्त अम्बरीष गोविंद राधे।
14स्वप्न समान मानते थे बता दे॥ 4742॥
15अम्बरीष मन था गोविंद राधे।
16श्रीकृष्ण में अनुरक्त बता दे॥ 4743॥
17अम्बरीष वाणी गोविंद राधे।
18कृष्ण गुणगान अनुरक्त थी बता दे॥ 4744॥
19कृष्ण की कथाओं में गोविंद राधे।
20कान थे नित्य अनुरक्त बता दे॥ 4745॥
21नेत्र अनुरक्त थे गोविंद राधे।
22हरि हरिजन दर्शन में बता दे॥ 4746॥
23त्वचा अनुरक्त थी गोविंद राधे।
24भक्तों के अंग संग में बता दे॥ 4747॥