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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 405

Reading 416 of 516 · Source nos. 4700–4711 · Source PDF 422

1कृष्ण ने कहा राधे गोविंद राधे।

2आओ यह भक्त हठी माने ना बता दे॥ 4700॥

3जब आईं लाड़िली जू गोविंद राधे।

4कहा बाबा ये हैं “मेरे वे” ही बता दे॥ 4701॥

5तब कहा बाबा ने गोविंद राधे।

6जय जय भक्तवश्य पिय प्यारी बता दे॥ 4702॥

7तब लाल लाड़िली ने गोविंद राधे।

8बाबा की जटा सुलझाई बता दे॥ 4703॥

9पुनि लाल लाड़िली ने गोविंद राधे।

10बाबा को उर ते लगाया बता दे॥ 4704॥

11ऐसे ही जो भी नर गोविंद राधे।

12दृढ़ विश्वास करि हरि को बुला दे॥ 4705॥

13हरि हों समक्ष वाके गोविंद राधे।

14प्रकट चिदानंद रूप में बता दे॥ 4706॥

15जो है महापापी गोविंद राधे।

16वह सोचे मोहिं हरि मिलें ना बता दे॥ 4707॥

17ऐसा पापी भी यदि गोविंद राधे।

18हरि दर्शन की प्यास बढ़ा दे॥ 4708॥

19तो मन शुद्ध हो गोविंद राधे।

20स्वरूप शक्ति मन दिव्य बना दे॥ 4709॥

21घर में खजाना गड़ा गोविंद राधे।

22भक्ति ते खोदे तो कुबेर बना दे॥ 4710॥

23श्रीकृष्ण दिव्यप्रेम गोविंद राधे।

24ह्लादिनी का सार साध्य भक्ति है बता दे॥ 4711॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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