Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 402
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1भाव के भूखे दोऊ गोविंद राधे।
2विदुरानी केले के छिलके खिला दे॥ 4664॥
3मंदिरों के भोग तजि गोविंद राधे।
4सखा मुख छोर कौर स्वाद बता दे॥ 4665॥
5श्याम का सखा सुदामा गोविंद राधे।
6तन्दुल चबा के ऐश्वर्य दिला दे॥ 4666॥
7श्याम का सखा सुदामा गोविंद राधे।
8आया, श्याम आँसू ते चरण धुला दे॥ 4667॥
9भक्तों के भक्त हरि गोविंद राधे।
10यमुना के तट घट गोपिन उठा दे॥ 4668॥
11ब्रह्म तो है बिनु मन गोविंद राधे।
12भक्तसुख हेतु नया मन भी बना दे॥ 4669॥
13जितना है प्रिय भक्त गोविंद राधे।
14उतनी ना प्रिय मोहिं कमला बता दे॥ 4670॥
15भक्त हैं प्रथम मेरे गोविंद राधे।
16मेरी आत्मा है द्वितीय बता दे॥ 4671॥
17भक्तों का भक्त हूँ मैं गोविंद राधे।
18भक्त का खरीदा हुआ दास बता दे॥ 4672॥
19ब्रज में थे एक बाबा गोविंद राधे।
20ब्रजरस में सराबोर बता दे॥ 4673॥
21आठों याम एक काम गोविंद राधे।
22श्यामा श्याम नाम रूप गुण गण गा दे॥ 4674॥
23कभु “हा कृष्ण! कहि गोविंद राधे।
24कभु “हा राधे! कहि आँसू बहा दे॥ 4675॥