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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 401

Reading 412 of 516 · Source nos. 4652–4663 · Source PDF 418

1भक्ति है तत् प्रधान गोविंद राधे।

2भाव यह भक्ति हरिआश्रित बता दे॥ 4652॥

3योग अरु ज्ञान दोनों गोविंद राधे।

4त्वं प्रधान भाव निज बल है बता दे॥ 4653॥

5भक्ति जीव यत्न नहिं गोविंद राधे।

6जीव के अधीश भगवान हैं बता दे॥ 4654॥

7कर्म, योग, ज्ञान का तो गोविंद राधे।

8आधार मायिक जीव बता दे॥ 4655॥

9किन्तु भक्तियोग का तो गोविंद राधे।

10आधार मायाधीश हैं बता दे॥ 4656॥

11भक्ति ह्लादिनी का सार गोविंद राधे।

12भक्त उर धरि हरि रस लें बता दे॥ 4657॥

13कृष्ण ह्लादिनी शक्ति गोविंद राधे।

14कृष्ण अरु भक्त को सुख दे बता दे॥ 4658॥

15भक्ति है विचित्र अति गोविंद राधे।

16भगवान की भी भगवत्ता भुला दे॥ 4659॥

17सबते बड़े हैं दोनों गोविंद राधे।

18उनते बड़ी है भक्ति दास बना दे॥ 4660॥

19स्वामी सखा सुत पति गोविंद राधे।

20बनि हरि सेवें तुच्छ जीव को बता दे॥ 4661॥

21भक्ति की है ऐसी शक्ति गोविंद राधे।

22ब्रह्म को भी गोपियों की छाछ नचा दे॥ 4662॥

23भक्ति का प्रभाव ऐसा गोविंद राधे।

24गज हित भागे आये कृष्ण बता दे॥ 4663॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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