Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 400
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1नवजात शिशु सम गोविंद राधे।
2भोला बनि रोना तोहिं हरि ते मिला दे॥ 4640॥
3हरि को बुलाओ रो के गोविंद राधे।
4पाछे परो हाथ धोके मिलेंगे बता दे॥ 4641॥
5हरि के मिलन की तो गोविंद राधे।
6आशा के साथ विश्वास बढ़ा दे॥ 4642॥
7बार बार सोचो यह गोविंद राधे।
8आज ही अभी ही श्याम झलक दिखा दे॥ 4643॥
9हरि तो हैं क्रीतदास गोविंद राधे।
10भक्त जैसा चाहे वैसा हरि ते करा दे॥ 4644॥
11हरि तो हैं भक्त भक्त गोविंद राधे।
12भक्त जैसा चाहे वैसा नाच नचा दे॥ 4645॥
13हठीले रसीले भक्त गोविंद राधे।
14हरि को जैसा चाहें नचा दें॥ 4646॥
15जीव को नचावे माया गोविंद राधे।
16ब्रह्म को नचावे दिव्यप्रेम बता दे॥ 4647॥
17भक्ति के वश में हैं गोविंद राधे।
18भक्ति जैसा चाहे वैसा नाच नचा दे॥ 4648॥
19भक्ति सत्व गुणवृत्ति गोविंद राधे।
20नहिं, भगवान सत्व वश ना बता दे॥ 4649॥
21भक्ति मायावृत्ति नहिं गोविंद राधे।
22भगवान मायाधीश हैं बता दे॥ 4650॥
23भक्ति है स्वरूप शक्ति गोविंद राधे।
24ऐसी भक्ति शक्ति ब्रह्म श्याम को नचा दे॥ 4651॥