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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 397

Reading 408 of 516 · Source nos. 4604–4615 · Source PDF 414

1शंका कुतर्क आदि गोविंद राधे।

2बुध जन का भी पतन करा दे॥ 4604॥

3श्रद्धा विश्वास अरु गोविंद राधे।

4गुरु शरणागति भक्ति दिला दे॥ 4605॥

5भक्ति साधकों को निम्न गोविंद राधे।

6दस बातों का रहे ध्यान बता दे॥ 4606॥

7नामापराध अरु गोविंद राधे।

8अवैष्णव संग का त्याग बता दे॥ 4607॥

9हानि लाभ में सम गोविंद राधे।

10शिष्यों की परम्परा का त्याग बता दे॥ 4608॥

11हरि हरिभक्त निन्दा गोविंद राधे।

12वेद शास्त्र निन्दा का त्याग बता दे॥ 4609॥

13धर्म अर्थ काम वार्ता गोविंद राधे।

14काहू सों ना करे ना तो सुने ही बता दे॥ 4610॥

15नाना ग्रन्थ पढ़े भी न गोविंद राधे।

16जग के अभाव में न दुखी हो बता दे॥ 4611॥

17प्राणीमात्र में हैं हरि गोविंद राधे।

18याते कभु किसी को ना दुख दे बता दे॥ 4612॥

19बार बार पढ़ो सुनो गोविंद राधे।

20हरि का चरित्र प्रेम पैदा करा दे॥ 4613॥

21प्रेम में न नेम कछु गोविंद राधे।

22सर्वत्र सदा मन हरि में लगा दे॥ 4614॥

23प्रेम का ही नेम सत्य गोविंद राधे।

24नेम का प्रेम तो धोखा बता दे॥ 4615॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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