Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 396
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1हरि हित रोने को गोविंद राधे।
2चैतन्यदेव व्याकुलता बता दे॥ 4592॥
3हरि हित रोने को गोविंद राधे।
4बल्लभ निःसाधनता बता दे॥ 4593॥
5हरि हित रोने को गोविंद राधे।
6ब्रज के रसिक जन लालसा बता दे॥ 4594॥
7दिव्य प्रेम पाने की गोविंद राधे।
8सर्वप्रथम तीव्र लालसा बढ़ा दे॥ 4595॥
9तीव्र लालसा ते ही गोविंद राधे।
10विषय विराग हरि राग हो बता दे॥ 4596॥
11आँसू न आवें दृग गोविंद राधे।
12नाम अपराध याको कारण बता दे॥ 4597॥
13हरि गुरु कृपा मानो गोविंद राधे।
14मन जब हरि हित आँसू बहा दे॥ 4598॥
15हरि ने ही करवाया गोविंद राधे।
16कृपा द्वारा भक्ति यह भावना बना दे॥ 4599॥
17जब हरि कृपा करे गोविंद राधे।
18भक्त निज लोक वेद निष्ठा भगा दे॥ 4600॥
19कृपा में देरी हेतु गोविंद राधे।
20भूत वर्तमान प्रतिबंध बता दे॥ 4601॥
21भूत प्रतिबंध तो है गोविंद राधे।
22सुत पति नारि का स्मरण बता दे॥ 4602॥
23वर्तमान प्रतिबंध गोविंद राधे।
24संशय दुराग्रह आदि हैं बता दे॥ 4603॥