Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 381
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1दोनों एक दूसरे को गोविंद राधे।
2देखि मुस्करा भी रहे हैं बता दे॥ 4412॥
3श्याम बड़े नटखट गोविंद राधे।
4सारी को और उरझा दिये बता दे॥ 4413॥
5ललिता कहीं श्याम गोविंद राधे।
6चलो हटो मैं सुरझा दूँ बता दे॥ 4414॥
7हरि का स्मरण ऐसा गोविंद राधे।
8घोर पापी मन शुद्ध करा दे॥ 4415॥
9ज्यों ज्यों मन शुद्ध होवे गोविंद राधे।
10त्यों त्यों हरि सूक्ष्म तत्व ज्ञान करा दे॥ 4416॥
11श्रवण या कर्म में तो गोविंद राधे।
12शक्ति नहीं है जो हरि को बुला दे॥ 4417॥
13श्रवण या कर्म जब गोविंद राधे।
14तड़पन युक्त हो तो हरि ते मिला दे॥ 4418॥
15हरि ते मिले बिनु गोविंद राधे।
16जीव ते रहा नहिं जाये जो बता दे॥ 4419॥
17जीव ते मिले बिनु गोविंद राधे।
18हरि ते भी रहा नहिं जाये बता दे॥ 4420॥
19साधक भक्त हित गोविंद राधे।
20कृष्ण सेवा दो भाँति की बता दे॥ 4421॥
21एक है प्रकट सेवा गोविंद राधे।
22एक है मानसी सेवा बता दे॥ 4422॥
23मूर्ति या चित्र में गोविंद राधे।
24श्यामा श्याम को मानि सेवे बता दे॥ 4423॥