Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 380
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1पिया के चरणों में गोविंद राधे।
2नूपुर धुनि रुनझुन है बता दे॥ 4400॥
3प्रिया पद अँगुरिन गोविंद राधे।
4रतनखचित बिछुये हैं बता दे॥ 4401॥
5पिया के चरणों में गोविंद राधे।
6तुलसीदल शोभित है बता दे॥ 4402॥
7दोनों की नखमणि गोविंद राधे।
8चन्द्रिका चमचमाती बता दे॥ 4403॥
9दोनों के चरणों के गोविंद राधे।
10तल में अलक्तक रंग बता दे॥ 4404॥
11जैसे नेत्रपलकें गोविंद राधे।
12नेत्र ते करें नित प्यार बता दे॥ 4405॥
13ऐसे ही रसिक जन गोविंद राधे।
14युगल चरण करें प्यार बता दे॥ 4406॥
15दोनों रूप सुधा सिन्धु गोविंद राधे।
16यह ध्यान तो है बिन्दु भी ना बता दे॥ 4407॥
17ऐसे ध्यान धरु उर गोविंद राधे।
18युगल किशोर का नित्य ही बता दे॥ 4408॥
19गरबाँहीं दै के गोविंद राधे।
20कुंज ते दोनों निकले बता दे॥ 4409॥
21श्यामा की नीली सारी गोविंद राधे।
22ललित लता में गई उरझ बता दे॥ 4410॥
23श्याम दोउ कर ते गोविंद राधे।
24सारी को सुरझा रहे हैं बता दे॥ 4411॥