Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 375
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1हरि के निमित्त सब गोविंद राधे।
2करे, हरि को ही करे अर्पित बता दे॥ 4340॥
3हरि गुरु एक मानि गोविंद राधे।
4भक्ति करे निष्काम भाव की बता दे॥ 4341॥
5लीला कथा नित्य सुने गोविंद राधे।
6नाम गुण गावे रूपध्यान करा दे॥ 4342॥
7याते हो प्रेम उर गोविंद राधे।
8प्रकट अवशि श्रीकृष्ण का बता दे॥ 4343॥
9इमि द्रुत चित्त भक्त गोविंद राधे।
10हँसे रोये गाये नाचे भाव में बता दे॥ 4344॥
11सम्पूर्ण जग में ही गोविंद राधे।
12निज इष्ट कृष्ण को देखे बता दे॥ 4345॥
13ऐसी साधना ते मिले गोविंद राधे।
14भक्ति वैराग्य हरिज्ञान बता दे॥ 4346॥
15मन राखे हरि ही में गोविंद राधे।
16इन्द्रियों को राखे चाहे जग में बता दे॥ 4347॥
17भुक्ति मुक्ति प्राप्ति में भी गोविंद राधे।
18आधे क्षण को भी कृष्ण भूले ना बता दे॥ 4348॥
19भक्ति नौ प्रकार की है गोविंद राधे।
20मुख्य श्रवण कीर्तन स्मरण बता दे॥ 4349॥
21इन तीन भक्ति में भी गोविंद राधे।
22रूपध्यान पै विशेष ध्यान दो बता दे॥ 4350॥
23साधन मन भाया करो गोविंद राधे।
24रूपध्यान मन ते अवशि करा दे॥ 4351॥