Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 374
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1कामना मिटाओ जनि गोविंद राधे।
2युगल चरण सेवा कामना बढ़ा दे॥ 4328॥
3श्यामा श्याम प्रेम तजि गोविंद राधे।
4वैकुण्ठ भी दे कोऊ तो ठुकरा दे॥ 4329॥
5नाभिपुत्र ऋषभ देव गोविंद राधे।
6थे अवतार भगवान के बता दे॥ 4330॥
7उनके थे सौ पुत्र गोविंद राधे।
8उनमें थे नौ योगीश्वर बता दे॥ 4331॥
9योगीश्वर कवि गोविंद राधे।
10हरि अंतरिक्ष पिप्पलायन बता दे॥ 4332॥
11प्रबुद्ध आविर्होत्र गोविंद राधे।
12द्रुमिल चमस करभाजन बता दे॥ 4333॥
13उपर्युक्त योगीश्वर गोविंद राधे।
14मायातीत जीवन्मुक्त थे बता दे॥ 4334॥
15एक बार ये सब गोविंद राधे।
16नृप निमि यज्ञ में थे पहुँचे बता दे॥ 4335॥
17उन योगीश्वरों ते गोविंद राधे।
18निमि ने पूछा था प्रश्न बता दे॥ 4336॥
19भागवत धर्म क्या है गोविंद राधे।
20भक्त का लक्षण क्या कृपया बता दे॥ 4337॥
21कवि ने उत्तर दिया गोविंद राधे।
22कृष्ण भक्ति भागवत धर्म बता दे॥ 4338॥
23तन, मन, बुद्धि, वाणी गोविंद राधे।
24इन्द्रियादि के जो कर्म बता दे॥ 4339॥