Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 369
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1जग में लगा है मन गोविंद राधे।
2याते प्रथम तत्वज्ञान करा दे॥ 4268॥
3तत्वज्ञान होने पै गोविंद राधे।
4साधना में छन छन मन को लगा दे॥ 4269॥
5ज्ञान तो तीन हैं गोविंद राधे।
6एक है तत् कृष्णज्ञान बता दे॥ 4270॥
7यह कृष्ण ज्ञान तो गोविंद राधे।
8है परम अनिवार्य बता दे॥ 4271॥
9दूसरा ज्ञान है गोविंद राधे।
10त्वं तत्व जीव का भी ज्ञान बता दे॥ 4272॥
11यह जीव ज्ञान भी गोविंद राधे।
12है परम अनिवार्य बता दे॥ 4273॥
13तीसरा ज्ञान तो है गोविंद राधे।
14जीव अरु ब्रह्म ऐक्य ज्ञान बता दे॥ 4274॥
15यह ज्ञान मुक्ति ही दे गोविंद राधे।
16याते है भक्तों को वर्ज्य बता दे॥ 4275॥
17कृष्ण जीव ज्ञान अरु गोविंद राधे।
18दोनों का सम्बन्ध ज्ञान करा दे॥ 4276॥
19पुनि साधन अरु गोविंद राधे।
20साध्य का भी ज्ञान करा दे॥ 4277॥
21पुनि गुरुतत्व ज्ञान गोविंद राधे।
22गुरु की शरणागति ज्ञान भी करा दे॥ 4278॥
23पुनि रूपध्यान अरु गोविंद राधे।
24निष्काम भाव का ज्ञान करा दे॥ 4279॥