Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 364
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1भक्ति है सुखरूपा गोविंद राधे।
2सुख का साधन ना भक्ति है बता दे॥ 4208॥
3कृष्णभक्ति फलरूपा गोविंद राधे।
4सुखरूपा कारणरहित बता दे॥ 4209॥
5भक्ति है फलरूपा गोविंद राधे।
6भक्ति ते फल जनि माँगो बता दे॥ 4210॥
7भक्ति का फल भक्ति गोविंद राधे।
8भक्ति का फल भगवत्प्राप्ति ना बता दे॥ 4211॥
9भक्ति फल और हो तो गोविंद राधे।
10भक्ति वृक्ष सम हो नीरस बता दे॥ 4212॥
11भक्तिफल रसरूप गोविंद राधे।
12फल में न छिलका न गुठली बता दे॥ 4213॥
13भक्ति है फलरूपा गोविंद राधे।
14सदा ही अमर रहे सब को बता दे॥ 4214॥
15भक्ति तो है फलरूपा गोविंद राधे।
16अमृतस्वरूपा, गुरु वर ते दिला दे॥ 4215॥
17“अमृतस्वरूपा च” गोविंद राधे।
18नारद भक्ति सूत्र अर्थ बता दे॥ 4216॥
19अमृतस्वरूपा अर्थ गोविंद राधे।
20भक्ति है भगवत्स्वरूपा बता दे॥ 4217॥
21साधन काल में तो गोविंद राधे।
22योग ज्ञान अमृत नहीं हैं बता दे॥ 4218॥
23एकमात्र भक्ति ही गोविंद राधे।
24साधन काल में भी अमृत बता दे॥ 4219॥