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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 363

Reading 374 of 516 · Source nos. 4196–4207 · Source PDF 380

1किन्तु पुनि कृष्ण ने गोविंद राधे।

2मैया के ज्ञान को भुलाया बता दे॥ 4196॥

3ऐसे ही ग्वाल आगे गोविंद राधे।

4कृष्ण ने दावानल पिया था बता दे॥ 4197॥

5तब भी ग्वालों को गोविंद राधे।

6हरि माहात्म्य ज्ञान हुआ था बता दे॥ 4198॥

7किन्तु पुनि कृष्ण ने ही गोविंद राधे।

8माया ते ज्ञान भुलाया बता दे॥ 4199॥

9ब्रजवासियों को भी गोविंद राधे।

10निज धाम दर्शन कराया बता दे॥ 4200॥

11तब भी ब्रजवासियों को गोविंद राधे।

12हरि माहात्म्य ज्ञान हुआ था बता दे॥ 4201॥

13पुनि ब्रजवासियों का गोविंद राधे।

14हरि ने भुलाया वह ज्ञान बता दे॥ 4202॥

15यदि माहात्म्य ज्ञान गोविंद राधे।

16रहता तो प्रेम नहिं मिलता बता दे॥ 4203॥

17फिर तो ब्रजवासी गोविंद राधे।

18भगवान मानि बस पूजते बता दे॥ 4204॥

19कृष्ण भिन्न देव भक्ति गोविंद राधे।

20रस रूप नहिं भाव रूप है बता दे॥ 4205॥

21श्रीकृष्ण की भक्ति गोविंद राधे।

22रसरूप की रसरूपा बता दे॥ 4206॥

23“फलरूपत्वात्” गोविंद राधे।

24सूत्र अर्थ भक्ति रसरूप बता दे॥ 4207॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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