Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 362
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1माहात्म्य सम्बन्ध गोविंद राधे।
2सेवा ज्ञान ते हो पुष्ट प्रेम बता दे॥ 4184॥
3अवतार काल में तो गोविंद राधे।
4बिनु माहात्म्यज्ञान प्रेम हो बता दे॥ 4185॥
5कामभाव युक्त प्रेम गोविंद राधे।
6माहात्म्यज्ञान रहित बता दे॥ 4186॥
7हरि माहात्म्य ज्ञान गोविंद राधे।
8साधक यदि भूले तो दूषण बता दे॥ 4187॥
9हरि माहात्म्य ज्ञान गोविंद राधे।
10सिद्ध यदि भूले तो भूषण बता दे॥ 4188॥
11गोपियों ने शास्त्र वेद गोविंद राधे।
12ना तो पढ़ा ना सुना ही बता दे॥ 4189॥
13गोपियों ने गुरुदीक्षा गोविंद राधे।
14किसी भी गुरु ते नहिं ली थी बता दे॥ 4190॥
15गोपियों ने कृष्ण हित गोविंद राधे।
16योग, जप, तप नहिं किया था बता दे॥ 4191॥
17गोपियाँ तो सिद्ध ही थीं गोविंद राधे।
18याते माहात्म्यज्ञान भूली थीं बता दे॥ 4192॥
19विरह में गोपियों को गोविंद राधे।
20हरि माहात्म्य ज्ञान पूर्ण था बता दे॥ 4193॥
21मृद्भक्षण लीला में गोविंद राधे।
22कृष्ण विराट रूप मैया को दिखा दे॥ 4194॥
23उस समय मैया को गोविंद राधे।
24हरि माहात्म्यज्ञान हुआ था बता दे॥ 4195॥