Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 361
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1अनुपयोगी जानि गोविंद राधे।
2करते हैं उसकी उपेक्षा बता दे॥ 4172॥
3लाभ या सुख जानि गोविंद राधे।
4होता है मन अनुराग बता दे॥ 4173॥
5ज्ञान की प्रेरणा ते गोविंद राधे।
6होता है राग अरु द्वेष बता दे॥ 4174॥
7व्यक्ति को भला जानि गोविंद राधे।
8उस पै हो श्रद्धा स्नेह बता दे॥ 4175॥
9व्यक्ति को बुरा जानि गोविंद राधे।
10वाते हो द्वेष या घृणा ही बता दे॥ 4176॥
11व्यक्ति सामान्य जानि गोविंद राधे।
12होगा उदासीन भाव बता दे॥ 4177॥
13माहात्म्य ज्ञान बिनु गोविंद राधे।
14प्रेम घटता ही जाये बता दे॥ 4178॥
15हरि सम्बन्धी ज्ञान गोविंद राधे।
16जितना भी हो प्रेम उतना बढ़ा दे॥ 4179॥
17सविशेष ज्ञान ते गोविंद राधे।
18होता है हरि ते प्रेम बता दे॥ 4180॥
19पुनि हरि प्रेम ते गोविंद राधे।
20होता है हरि सूक्ष्म ज्ञान बता दे॥ 4181॥
21सालिगराम में तो गोविंद राधे।
22नहिं सौंदर्य किन्तु प्रेम है बता दे॥ 4182॥
23याते यह सिद्ध हुआ गोविंद राधे।
24माहात्म्य ज्ञान प्रेम करा दे॥ 4183॥